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॥ ईशावास्य उपनिषद् ॥

ॐ ईशा वास्यमिदँ सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥

जगत् मे जो कुछ स्थावर-जङ्गम संसार है, वह सब ईश्वर के द्वारा व्याप्त है। उसका त्याग-भाव उपभोग करना चाहिए, किसी के धन की इच्छा नहीं करनी चाहिए।।

कुम्भ-2019

आस्था, विश्वास, सौहार्द एवं संस्कृतियों के मिलन का पर्व है “कुम्भ”। ज्ञान, चेतना और उसका परस्पर मंथन कुम्भ मेले का वो आयाम है जो आदि काल से ही हिन्दू धर्मावलम्बियों की जागृत चेतना को बिना किसी आमन्त्रण के खींच कर ले आता है। कुम्भ पर्व किसी इतिहास निर्माण के दृष्टिकोण से नहीं शुरू हुआ था अपितु इसका इतिहास समय द्वारा स्वयं ही बन गया।  
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वैचारिक कुम्भ

कुम्भ अर्थात् कलश, जिसका सम्बन्ध समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश से है। तत्वदर्शन की दृष्टि से कुम्भ यानि प्रकृति एवं जीव तत्व का संयोजन है, जो अमृत तत्व है। इस तत्व को केन्द्र में रखकर विभिन्न मतों-अभिमतों के वैचारिक मंथन का यह पर्व है और इससे निकलने वाला ज्ञानामृत ही कुम्भ-पर्व का प्रसाद है।
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Narendra Modi

भारत की नित्य, नूतन, चिर, सनातन परंपरा ने प्रकर्ति में परमात्मा को देखा है. हम प्रकर्ति से उतना ही लेते है जितना आवश्यक है. हमारी संस्कृति में ऋतू चक्र ही जीवन चक्र है. मौसम और ऋतुओं को व्रत और त्यौहार की तरह मनाना. पेड़ पौधों की पूजा करना. हम मिटटी को भी अपने प्राणो से प्यारे मानते है. हमने प्रकृति को हमेशा संजीव माना है और सहजीव माना है. पर्यावरण की रक्षा हमारी हज़ारों सालों की जीवन शैली का हिस्सा है. हम सुबह उठते ही धरती माता को छूकर, माफ़ी मांगकर ही अपने पैर जमीं पर रखते है.

Narendra Modi - Prime Minister, Government of India

Venkaiah Naidu

  महामहिम उपराष्ट्रपति जी को यह जानकर हर्ष हुआ कि महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी (पर्यावरण कुंभ आयोजन समिति) द्वारा 01 -02 दिसंबर, 2018 को दो दिवसीय "कुंभ एवं पर्यावरण संबधित विशाल प्रदर्शनी" का आयोजन किया जा रहा हे तथा पर्यावरण कुंभ की वेबसाइट व कार्यक्रम का ब्यौरा प्रकाशित करने के उद्देश्य से "पत्रिकाओं" का प्रकाशन भी किया जा रहा हे जो कि एक सराहनीय प्रयास हे | महामहिम उपराष्ट्रपति जी महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के सभी पदाधिकारिओं/कर्मचारियों के उज्जवल भविष्य कि कामना करते हे तथा आयोज्यमान "कुंभ एवं पर्यावरण संबधित विशाल प्रदर्शनी" एवं प्रकाश्यमान "पत्रिकाओं" की सफलता हेतु अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ संप्रेषित करते हे |

Venkaiah Naidu - Vice President of India

Yogi Adityanath

मुझे यहाँ जानकर अत्यंत प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है की महात्मा काशी विद्यापीठ द्वारा दिनांक 1 और 2 दिसंबर, 2018 को वाराणसी में दो दिवसीय 'पर्यावरण कुम्भ' का आयोजन किया जा रहा है. मानव और प्रकृति एक दूसरे के पूरक है. हम प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रकृति पर आश्रित है. प्रकृति के बिना हमारा अस्तित्व संभव नहीं है. प्रकृति सरंक्षण हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है. इसमें वृक्ष को पुत्र, नदी को माँ तथा वायु को देवता माना जाता है. प्रकृति को क्षति पहुंचेगी तो इसका सीधा प्रभाव मानव जीवन पर भी पड़ेगा. इसलिए भावी पीढ़ी को पर्यावरण के सरंक्षण और महत्त्व के प्रति जागरूक करना आवशयक है. मुझे विश्वास है की यह आयोजन धरती को हरा-भरा रखने एवं पर्यावरण संवर्धन के प्रति युवा पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाने में उपयोगी सिद्ध होगा. आयोजन की सफलता हेतु मेरी हार्दिक शुभकामनाएं.

Chief Minister, Uttar Pradesh

पञ्चतत्त्व

ईश्वर यानि भगवान ने अपने अंश में से पांच तत्व- भूमि, गगन, वायु, अग्नि, जल का समावेश कर मानव देह की रचना की और उसे सम्पूर्ण योग्यताएं और शक्तियां देकर इस संसार में स्वच्छतापूर्वक जीवन बिताने के लिए भेजा है।

जल तत्व

जल तत्व हमारे शरीर और जीवन के प्रवाह को सुरक्षित बनाये रखता है। जल की प्रकृति शीतल ...

पृथ्वी तत्व

समस्त संसार आकर्षण और विकर्षण से प्रभावित होता है। पृथ्वी के उत्तर-दक्षिण दिशा में चुंबकीय ध्रुव विद्यमान ...

अग्नि तत्व

अग्नि तत्व हमारे शरीर में अग्नि को उत्पन्न करके शरीर में उपस्थिति जल को उष्णता प्रदान करता ...

वायु तत्व

वायु तत्व ही जीवन होता है। यह शरीर के प्रत्येक भाग का संचालन करती है। यह हृदय ...

आकाश तत्व

अन्य चारों तत्वों को अवकाश देना, सबके भीतर और बाहर रहना तथा प्राण, इन्द्रिय, और मन का ...

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